Friday, April 21, 2017

आज बादळ ....

आज बादळ
पहाड़ो मुण्ड मलसणो ऐन
देखी की सरग रूण बटी गै,
गाड, गदिरा आसूॅ बगाण बटि गैन।
अर म्यार सरेल ठण्डू होयूं च।
अतुल गुसाईं जाखी (सर्वाधिकरा सुरक्षित)

Wednesday, April 12, 2017

त्वे कैन सिखे कविता लिखण?

दुख ऐनी खैरी दगड़
खैर सिखे गै मी कविता लिखण
गौं बटी खुद आई बाडुळी दगड़
बाडुळी सिखे गै मी कविता लिखण।
खुद मा कभी आॅसू छुटिन अर स्याई बणिन
वा आॅसू कि स्याई सिखे गै मी कविता लिखण।
और कु सिखे गै त्वे कविता लिखण?
घस्येरियों दगड़ एक बांद देखी छै
वींकि दाथुड़ी  सिखे गै मी कविता लिखण।
कुछ दिन माया लगै गे, फिर छोडी गै दोष लगै की
वींका घौ अर दोष सिखै गिन मी कविता लिखण।
और कु सिखे गै त्वे कविता लिखण?
मेरी गरीबी सिखे गै मी कविता लिखण
शहरों कि वा भीड़ ज्वा हैंसणी छै मी फर
व भीड सिखे गै मी कविता लिखण।
खैरी का बाटों मा चलदा -चलदा
चुभदा गारा सिखे गिन मी कविता लिखण।।
अतुल गुसाईं जाखी सर्वाधिकार सुरक्षित

Tuesday, April 11, 2017

कै-कै जि मनो मी।

एक तू ही नि छै
जु नाराज च मी सै
पौन नाराज  च
पंछी नाराज छन
पहाड़ नाराज च।
गौं नाराज च
गैल्या नाराज छन
गौडी-भैसी नाराज छन।
देळी नाराज च
द्यू नाराज च
देवता नाराज छन।

सगोड़ी नाराज छन
सेरा नाराज छन
सदनी सबी नाराज ही रैन
पर
सबौ से दूर रै की
कै-कै जि मनो मी।
अतुल गुसाईं जाखी सर्वाधिकार सुरक्षित

Monday, April 10, 2017

प्रेम रस लिखणा कु माया जरूरी च।

तेरा दिल मा माया कि बिज्वाण जमेनि साकू मि।
तेरा जिकुडा कु, माया कु माली बणी नि साकू मि।।
लोग पुछनिद रे अतुल !
तु प्रेम रस कि कबिता कलै नि लिखदी
अपणी अद्धखिचरी माया सुणे नि साकू मी।।
अतुल गुसाईं जाखी (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Friday, April 7, 2017

च्यो जरूरी च...

हमरा चैका पगार रौड़
अर पगार खित हैंसी
मिन बोली!
मेरी पाॅच लाखे कूड़ी घाम लागे छै
अर तु हॅसणी छै।
बल-
कूड़ी इथगा ही फिकर रैन्दी त
पाॅच लाख वे फर लगैन
त द्वी लाख मी फर भी लगेदेन्दी।।
अतुल गुसाईं जाखी( सर्वाधिकार सुरक्षित)

Thursday, April 6, 2017

डाॅक्टर अगर भगवान कु रूप च त फिर डाॅक्टर देवभूमी मा कलै नि रैन्दिन ?

डाॅक्टर अगर भगवान कु रूप च त फिर डाॅक्टर देवभूमी मा कलै नि रैन्दिन ?
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कुछ दिन पैली कफग मा एक चुटकला पढ़णू छौ- कुछ लोग राम नाम सत्य बोली की एक मुर्दा थै बजारा का रस्ता मडघाट लिजाणा छा, बजार मा द्वी डाॅक्टर च्या दुकान मा च्या पीणा छा जनी जनाजा बजारा मा पौछी त डाॅक्टर साबन पूछी कि लाला जी आज कु मोरी, लालाजीन बोली कि फलणा गौ कु फजितु मोरी गे रै होलू 40,45 साल कु।
अब एक डाॅक्टर हैका डाॅक्टर का कनूड मा ब्वनू च कि यार डाॅक्टर साब ऐ  फजितु तै दवे क्या तिल दीन! बल न यार मिल त नि दीना, बल फिर तिन दीन क्या? बल ना यार मिल भी नि दीना। बल जब तिल भि नि द,े मिल भी नि दे, त यु बजार मा तिसरो डाॅक्टर कु एै।
ब्वनो कु मतलब यु च कि कुछ त हम देवभूमी का लोग यूंका होण से म्वना छा अर कुछ यूंका नि होण से।  हमर पहाड़ मा अधिक्तर फर्जी डाॅक्टर छन जु अतिरी-बितरी कु काम एै जन्दिन पर यूं थै ज्यादा जानकारी नि होण से यु हमरू काम-तमाम भी कैरी देन्दिन। कै थै अगर जुखाम लगणू रैन्द त यु पुटगा पीणा कि दवे दे देन्दिन। कैकु अगर सुल्टु हाथ टुटी गै त यु उल्टा हाथ फर पलस्तर कैरी देन्दिन। वेका बाद दवे फर दवे खाणा का बाद हम पौछी जांदा सीधा मड़घाट। पर दिक्कत या च कि अगर फर्जी डाॅक्टर मा नि जाण त जाण कख च, अच्छा प्राईवेट अस्पलाळ हमरा यख छौ नि छन अर सरकरी मा डाॅक्टर एक मैना सि ज्यादा टिकेन्दु नि च। अर डाॅक्टर टिकेन्दू इलै नी चा कि डाॅक्टर अधिक्तर भैरा महानगरों का रैण ओळ रैन्दिन वै थै सिर्फ पैसा कमाण से मतलब च जु कि उ पहाड़ मा रै कि नि कमै सकद। मि सबों कु नि बोली सकदू पर मुख्य  कारण यु ही च। दुसरों कारण वे थै हमरी भाषा समझ मा नि आंदी यु भी मुख्य कारण च, ज्वान रोजगारा बाना महानगरों मा छन गौं मा दान-दान आदिम छन अर वीं बिमार होन्दिन। उ दगड़ दिक्कत या च कि अगर क्वी बिमार होंद त उ पैली डाॅक्टर मा नि दिखान्द उ सोचद कि पित्र दोष लग्याॅ होला, हमरू देवता दोष लग्याॅ होला, 10-15 दिन उच्यणू धरदा-धरदा कटे जन्दिन अर जब बिमरी ज्यादा बडी जान्दी तब जैकी डाॅक्टर मा जन्दिन। डाॅक्टर मा जै की डाॅक्टर पुछद माता जी, बाबा जी क्या हो रहा है? त वख मा भाषा कि समस्या खडी ह्वे जांद, माता जी भी अपणी ही बोली मा बबा धपाग होणी चा, चसग भी जाणा छन अर स्वास भी फुलणू च अर बै हौण फरकी नि सकणू छौ। डाॅक्टर इथगा ही सूणी की परेशान ह्वे जांद कि यार इन मेसी बिमरी त किताब मा पौढ़ी नि छौ न कखी सूणी या नै बिमरी कख बटी एै! फिर वे विचरा मा भी एक ही रस्ता रान्द जथगा जल्दी ह्वे साकू यख बटी भगण मा ही फैदा च। इलै मिन सुरू मा लेखी छौ कुछ त हम यूंका होण से म्वना छा कुछ नि होण से।
अतुल गुसाई जाखी (सर्वाधिकार सुरक्षित)

Tuesday, April 4, 2017

गुठ्यार

एक गुठ्यार भितर
गौड़ी/भैंसी/बखरी/खाडू
सब अलग-अलग जाती का
स्वार-भै सी लगदिन,
एक पूळौ घास
आपस मा मिली जुली की खान्दिन।
अर हैंका गुठ्यार भितर
हिन्दू/मुसलिम/सिख/इसाई
पर रोज होन्दिन!
गाळी-गलोच/ओछी-आलोचना
धर्म का नौ फर विवाद
दंगा-फसाद
दिखेणा खुण यु मनखी छन
पर जानवरों जन छन
सिंगसार, लत्याड़,
एक-हैंका खुण डुंगरताळ
कमजोरा खुण भटकताळ
कैर देन्दिन लम्पसार।।
अतुल गुसाई जाखी (सर्वाधिकार सुरक्षित)
8802374472