Thursday, July 27, 2017

सर्व शिक्षा अभियान कु बोल्ड लग्यूॅ छौ...

सर्व शिक्षा अभियान कु बोल्ड लग्यूॅ छौ
मिन इन झाणी यख शिक्षा बंटेणी च,
भितर देखी त वख, दाळ-भात खयेणी छै।।
मिन पूछी-
क्य बात च हेडमास्टर साब,
खूब घरात खलेणी च,
कै छ्वारा नामकरण च या
फिर कै मैडम कि बरात आणी च।।
हेडमास्टर-
अरे आवा-आवा गुसाॅई जी
दाळ-भात तुम भी खावा जी,
बल या त सर्व-शिक्षा च
सरकार की तरफाॅ बटी नौनू कु भिक्षा च।।
मिन बोली-
सरकार की तरफ बटी
नौनू कु भिक्षा यु ता ठीक च,
पर टेवल मा टंगड़ा पसारी बैठण,
कखकी शिक्षा च।।
हेडमास्टर-
याॅ मा मेरू क्य कसूर च
गाॅव मेरू बहुत दूर च,
आंद-आंद थकि जान्दू
याॅले आराम सी बैठी जान्दू।।

मि अपणा हि मन मा सुचणू रौ
कभी अफ थै त कभी मत्थी औळ थै कुसणू रौ,
हे माॅ या कन च तेरी लीला!
नौनू कु भविष्य ह्वे गे ठीला।।

तु अब भी मौन बैठीं छै
बीणा पकड़ी चुपचाप खड़ी छै,
अब त तेरू ही सारू च
हर नौना कू एक ही नारू च।।

Saturday, July 22, 2017

जांदरी घुमदी छै बल कबी..

जांदरी घुमदी छै बल कबी
गंज्यळी नचदी छै बल कबी
उरख्याली हैंसदी छै बल कबी
सुप्फा साज सुणाद छौ बल कबी
छफिरो गीत लगांद छौ बल कबी
नाज दनकुदो छौ बल कबी
देखी की-
कुठार खुस छौ बल कबी।
मरखी रे!
तिन सब मारे लिन।।


Friday, July 21, 2017

पहाड़ बटी मनखी.....

वे दिन जै दिन उ
वे दिन जै दिन उ
मी थै छोड़ी कि गै
कुड़ी देखदी रै
पंदेरू रूणू रै
बाटन बाड़ नि कैै
सुचणू रै पहाड!़
पहाड़ बटी मनखी
झणि कलै गै।


Friday, May 26, 2017

मास्टरों का हाल

सर्व शिक्षा अभियान कु बोल्ड लग्यूॅ छौ
मिन इन झाणी यख शिक्षा बंटेणी च,
भितर देखी त वख, दाळ-भात खयेणी छै।।
मिन पूछी-
क्य बात च हेडमास्टर साब,
खूब घरात खलेणी च,
कै छ्वारा नामकरण च या
फिर कै मैडम कि बरात आणी च।।
हेडमास्टर-
अरे आवा-आवा गुसाॅई जी
दाळ-भात तुम भी खावा जी,
बल लाटा या त सर्व-शिक्षा च
सरकार की तरफाॅ बटी नौनू कु भिक्षा च।।
मिन बोली-
सरकार की तरफ बटी
नौनू कु भिक्षा यु ता ठीक च,
पर टेवल मा टंगड़ा पसारी बैठण,
कखकी शिक्षा च।।
हेडमास्टर-
याॅ मा मेरू क्य कसूर च
गाॅव मेरू बहुत दूर च,
आंद-आंद थकि जान्दू
याॅले आराम सी बैठी जान्दू।।

मि अपणा हि मन मा सुचणू रौ
कभी अफ थै त कभी मत्थी औळ थै कुसणू रौ,
हे माॅ या कन च तेरी लीला!
नौनू कु भविश्य ह्वे गे ठीला।।

तु अब भी मौन बैठीं छै
बीणा पकड़ी चुपचाप खड़ी छै,
अब त तेरू ही सारू च
हर नौना कू एक ही नारू च।।

Tuesday, May 9, 2017

इन जिन्दगी त मी नि चैणी.....

जैंई जिन्दगी मा
रस, छंद, अलंकार न हो,
जैंई जिन्दगी मा
अपणी भाषा,
अपणी संस्कृति,
अपणा रीत रिवाज न हो,
पैरणा खुण जख
दुफड़की ट्वपली, काळी फतगी
गात न हो,
खाणा कु जख कोदू, झगोरू
छंच्य भात न हो,
जैंई जिन्दगी मा नचणा कू
ढोल, दमौं मसका बाज न हो
दान बुड्यों की कछड़ी मा
जख हुक्का साज न हो,
न भुलों न, कतै न
इन जिन्दगी त मी नि चैणी।।
अतुल गुसाईं जाखी (सर्वाधिकरा सुरक्षित)

Friday, April 21, 2017

आज बादळ ....

आज बादळ
पहाड़ो मुण्ड मलसणो ऐन
देखी की सरग रूण बटी गै,
गाड, गदिरा आसूॅ बगाण बटि गैन।
अर म्यार सरेल ठण्डू होयूं च।
अतुल गुसाईं जाखी (सर्वाधिकरा सुरक्षित)

Wednesday, April 12, 2017

त्वे कैन सिखे कविता लिखण?

दुख ऐनी खैरी दगड़
खैर सिखे गै मी कविता लिखण
गौं बटी खुद आई बाडुळी दगड़
बाडुळी सिखे गै मी कविता लिखण।
खुद मा कभी आॅसू छुटिन अर स्याई बणिन
वा आॅसू कि स्याई सिखे गै मी कविता लिखण।
और कु सिखे गै त्वे कविता लिखण?
घस्येरियों दगड़ एक बांद देखी छै
वींकि दाथुड़ी  सिखे गै मी कविता लिखण।
कुछ दिन माया लगै गे, फिर छोडी गै दोष लगै की
वींका घौ अर दोष सिखै गिन मी कविता लिखण।
और कु सिखे गै त्वे कविता लिखण?
मेरी गरीबी सिखे गै मी कविता लिखण
शहरों कि वा भीड़ ज्वा हैंसणी छै मी फर
व भीड सिखे गै मी कविता लिखण।
खैरी का बाटों मा चलदा -चलदा
चुभदा गारा सिखे गिन मी कविता लिखण।।
अतुल गुसाईं जाखी सर्वाधिकार सुरक्षित