Monday, August 1, 2016

प्रेम भाई की अपणी मधुर आवाज दिनी च...

चल रामी घौर का बाद एक बार फिर प्रेम भाई खुण लिखणा कु मौका मिली अर अबरी दां मिन आप लोगों का वास्ता लेखी एक गजल जै थै प्रेम भाई की अपणी मधुर आवाज दिनी च । या गजल कृष्णा एल्बम कु दुसरु गीत होलु बस जरा इंतजार करा.......

Saturday, July 30, 2016

गौ खुशहाल त राज्य खुशहाल अर वे खुण...


गौ खुशहाल त राज्य खुशहाल अर वे खुण जरुरी च चकबंदी अर नशबंदी । चकबंदी कु इथगा बडू बिल पास हुयुं ई खुसी मा यु जाखी चुप रौ इन त नि ह्वे सकद। सबसे पैली बहुत बहुत बधाई गणेश गरीब जी थै अर उंकी टीम थै जौंकि मेहनत कु फल आज हम सब थै मिली।अब मी आपबीती सुणाण छौ एक दिन की, बौत पैली चकबंदी टीमन चकबंदी बैनर तैळ एक कवी समेलन कौरी छौ। मी थै याद च मी खुण अनूप पटवाल भुल्ला कु फोन आई छौ हैलो बल गुसाईं जी ब्वाना छा मिन बोली हाँ क्या बात च पटवाल जी ।बल भैजि भोळ कवि समेलन च अर आप थै आण पडलु अर चकबंदी पर एक कविता सुणाण पडली , मिन बोली जरूर भुला। अब उमर काफ़ी ह्वे गे कनूण (कान) भी फूटी गैन मिन चकबंदी का जगा नसबंदी सूणी दीन, अर मि निर्भगी सरी रात नसबंदी पर कविता लिखणु रौ। दूसरा दिन जब गढ़वाल भवन पौछु त वख चकबंदी फर काव्य गोष्टी हूँणी छै । मिन बोली बेटा जाखी आज त भारी बेजती हूँण वोळ च भै! मिन भि क्या कारी सटपटां मा जख जख मा नसबंदी छौ वख मा चकबंदी कौरी दिन। अर मंच संचालक भी इन जनि भीतर गौं तनी उन मी मंच मा बुले दीन बल अब मैं आमन्त्रित करता हूँ अतुल गुसाईं जाखी जी का उन का जोर दार तालियों के साथ स्वागत करो और वो सुनाने जा रहे है चकबंदी से होने वाले पलायन पर एक दर्द भरी कविता - लोगों की ताली क्या सुणिन मिन कि म्यार मुख मा झम रात पोड़ि गे पर क्या कन छौ कविता त सुणाण ही छै, कविता कुछ इन छै द्वी लाइन लेखी देंदु कुछ बेजती वे दिन ह्वे आज पूरी कै देन्दु। ............................................,.........................
मेरी श्रीमतीन बोली
अजी बल सुणा छा,
मिन बोली हाँ।
बल बच्याँ राल त
द्वी फांगा बहुत छन
हौळ त लागी गे
अब जोळ भी लगे द्योला
कै भला सी डॉक्टर मा दिखे की
चकबंदी कै द्योला।।
मिन सूणी क्वी गणेश गरीब च
चला वे मा ही जौला
अर चकबंदी की थोडा बौत जानकारी
पूछी कि औला।
भगवान सुख रखलु त
हैंका मंगसीर
चकबंदी कैरी द्योल।
बल तुमरु त क्या जाणू
हौळ लगे की तुमन देस भागी जांण
यूँ फांगों कि रेख-देख मा
सै-ससुरों की गाली त
हमन खाण........
आगे की लाइने बक्त मिलेगा तो फिर कभी सुनाऊंगा।
अतुल गुसाईं जाखी।

Friday, July 29, 2016

फिकर शब्द जु शब्द आज हरचण वटी गे...

गढ़वाळी मनखी ही न,
गढ़वाळी शब्द भी ईमानदार छन,
फिकर बिचरी त शर्मा खातिर
या फिर हम फर दया खै की,
कभी चली गे छै।
लोग त अब बिगर बाती कु
टेंसन लेणा छन।
सर्वाधिकार सुरक्षित @ अतुल गुसाईँ

Friday, July 1, 2016

दोष कै थै द्यो मी...

आज चमोली जनपद आई दैवीय आपदा में मारे गये सभी लोगो के प्रति अपनी संवेदना ब्यक्त करता हूँ।
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दोष कै थै द्यो मी
वे बादळ थै
जु हर साल तोड़ी जांद
मेरी धुरपाळ
अर बुगे ली जांद
द्वार मोर संघाड़
चिवाड़ किवाड़
मेरी चौक छपाल।
या दोष द्यो मी
वे पहाड़ थै
जु जरा बरखा मा
टुट्टी जांद
अर दबे जांद
मेरी नीमदरी छज्जा
मी दगड़ म्यारा
छोटा-छोटा बाल-बच्चा।
या दोष द्यो
वे विकास थै
जु बड़ा-बड़ा मशीन
ले की आंद
अर म्यार पहाड़
चीरी जांद।
या दोष द्यो
ऊँ देवतों थै
जौंका सारा हम यख बस्याँ छा।

सर्वाधिकार सुरक्षित @लेख. अतुल गुसाईं जाखी


Thursday, June 30, 2016

एक ही दुःख हो त...

एक ही दुःख हो
त त्वे मा बोल मी,
सिर्फ जिकुड़ी उदास हो
त त्वे मा बोल मी,
यख त आंख्यों मा
बारा मैना बसग्याळ लग्यूं
सिर्फ सौण भादो कि बात हो
त त्वे मा बोल मी।
अपणा बिरणा सब्बी रुठ्यां छन
सिर्फ नरों की बात हो
त त्वे मा बोल मी,
यख त देवता भी दोस लग्यां छन
सिर्फ भूत पुज्ये की बात हो
त त्वे मा बोल मी।
त्वे मा बोली की अगर
म्यारा दुःख कम हुंदिन
त आज सरी रात
ख़ैरि कि बात त्वे मा
लगे द्यों मी।
सर्वाधिकार सुरक्षित @लेख. अतुल गुसाईं जाखी

Wednesday, June 22, 2016

पलायन

पलायन रोको पलायन रोको
चिल्लाणा छा जु!
ब्याळी दिल्ली मा देखिन
अपणी लैन्टरदार कुड़ी
सजाणा छा उ।
कि कनक्वे रुकण पलायन
अर कनक्वे बचाण खेती!
भैजी गौ मा सारी चौकीदार
धर्यूं छौ जु,
अपणा गोरु थै उज्याड
खलाणु रै उ।
अतुल गुसाईं जाखी
(सर्वाधिकार सुरक्षित)